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पकड़ा गया आदिम जाति विभाग का रिश्वतखोर प्यून, चार हजार रूपए की रिश्वत ने खोली पोल…

छिंदवाड़ा के आदिम जाति कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला लंबे समय से चल रहा है। हॉस्टल में बच्चों के खाने में रिश्वत का घुन लगा हुआ है और कर्मचारियों को सस्पेंड करने और बहाल करने में हजारो रूपए का लेन-देन भी आम है। भ्रष्टाचार की चचाओं पर मंगलवार को मुहर भी लगगई।

छिंदवाड़ा के कलेक्ट्रेट स्थित आदिवासी विकास विभाग (ट्राइबल विभाग) में मंगलवार को लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने विभाग में पदस्थ कर्मचारी ललित अहिरवार को 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी ने रिश्वत की रकम छिपाने के लिए लिफाफा कूलर के नीचे रख दिया था, लेकिन लोकायुक्त की टीम ने तलाशी लेकर रकम बरामद कर ली। कार्रवाई के दौरान आरोपी के हाथ भी रंगीन हो गए।

ईएमडी की रकम लौटाने के बदले मांगे थे 4 हजार

मामले में शिकायतकर्ता सौरभ मिश्रा ने बताया कि नवेगांव में छात्रावास की बाउंड्रीवाल निर्माण का टेंडर हुआ था। टेंडर प्रक्रिया में 52 में से 24

पहले भी खुल चुकी रिश्वतखोरी की पोल

छिंदवाड़ा की अमरवाडा तहसील के

लहंगडुआ में रहने वाले गंगाराम सूर्यवंशी आदिवासी बालक छात्रावास सोनपुर में चपरासी है। उनके बेटे नीलेश सूर्यवंशी ने सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि सुधारने का आवेदन दिया था। इस पर संगीता झाड़े ने उससे 80 हजार रुपये की मांग की थी। पहली किस्त के तौर पर जैसे ही 25 हजार रुपये दिए गए, लोकायुक्त पुलिस ने अधिकारी को पकड़ लिया। यह मामला साल 2022 में का है। खास बात यह है कि उस दिन भी मंगलवार ही था।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ महीने से ईएमडी की राशि को लेकर उन्हें परेशान किया जा रहा था। करीब एक महीने पहले भी इस संबंध में बातचीत हुई थी। इसके बाद उन्होंने लोकायुक्त से शिकायत की। शिकायत की पुष्टि के बाद

टेंडर पिछले 6 महीनों में निरस्त किए गए थे। इसी प्रक्रिया के तहत उनकी 28 हजार रुपए की ईएमडी (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट) राशि वापस होनी

पैसे लेकर दबा दी जाती है जांच

आदिम जाति कल्याण विभाग में पैसे का इतना प्रभाव है कि कर्मचारी खुल्लेआम पैसे लेकर जांच की फाइल दबा देते हैं। एक आवेदक की शिकायत पर तामिया सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्य बीके सानेर की जांच वरिष्ठ अधिकारियों ने की है, इस जांच रिपोर्ट में बीके सानेर पर लगे सारे आरोप सही पाए गए हैं। जांच में पाया गया है कि श्री सानेर ने व्यक्तिगत फायदे के लिए कई स्तर पर झूठ बोला है लेकिन पूरी जांच रिपोर्ट यहां के बाबू गपा गए हैं। चर्चा है कि इसके लिए अफसरों से लेकर बाबूओं ने बहुत वजनदार लिफाफा लिया है।

डेढ़ महीने से कर रहा था परेशान

मंगलवार को टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की और आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ लिया। फिलहाल लोकायुक्त की टीम कलेक्ट्रेट स्थित ट्राइबल विभाग में कार्रवाई कर रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

थी। आरोप है कि यह राशि वापस दिलाने के बदले आरोपी ललित अहिरवार ने 4 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।